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अष्टाध्यायी 1.2.1

*प्रथमाध्यायस्य द्वितीयः पादः*
🔥 *गाङ्कुटादिभ्योsञ्णित् ङित्।  1.2.1*
🔥  प वि:- गाङ्-कुटादिभ्यः 5.3। अञ्णित् 1.1 ङित् 1.1। (कुट आर्दियेषां ते कुटादयः। )
🔥 अर्थ: - गाङ्-आदेशात् और कुटादिभ्यश्च धातुभ्यः परे ञिद्- णिद्-भिन्नाः प्रत्ययाः ङिद्-वद् भवति। 
🔥 आर्यभाषा:- गाङ् आदेश और कुट आदि धातुओं से परे ञित् और णित् से भिन्न प्रत्यय ङिद्-वत् होते हैं।  
🔥 उदाहरण:- कुटिता।  कुट + *तृच* ।

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