🔥 *विज इट्।1.2.2*
🔥 प पि:- विजः 5.1। इट् 1.1।
🔥 अर्थ: - विजो धातोः पर इडादिप्रत्ययो ङिद्-वद् भवति।
🔥 आर्यभाषा: - विज धातु से परे इडादि प्रत्यय ङिद्-वद् होते हैं।
🔥 उदाहरण: - विज् + तृच्। विज+इट् +तृ। यहाँ भी तृच के ङित होने से अंग के गुण होने का निषेध होता है। (पुगन्तलघूपधस्य च , से गुण प्राप्त था)
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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