🔥 *देवब्राह्मणोरनुदात्तः।1.2.38*
🔥 प वि:- देव-ब्रह्मणोः 6.2। अनुदात्तः 1.1।
🔥 अनुवृत्ति: - सुब्रह्मण्यायां एकश्रुति न।
🔥 अर्थ: - सुब्रह्मण्यायां निगदे देव- ब्रह्मणोः शब्दयोः एकश्रुति न भवति, परंतु तत्र स्वरितस्य स्थाने अनुदात्तादेशो भवति।
🔥 आर्यभाषा: - सुब्रह्मण्या नामक निगद में देव और ब्रह्मण शब्दों का एकश्रुति स्वर नहीं होता परंतु वहाँ स्वरित को अनुदात्त स्वर होता है।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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