🔥 *इन्धिभवतिभ्यां च।1.2.6*
🔥 अनुवृत्ति: - लिट्, कित्।
🔥 अर्थ: - इन्धिभवतिभ्यामपि धातोः परो लिट् प्रत्यय कित्-वद् भवति।
🔥 आर्यभाषा: - इन्धि और भवति धातु से परे लिट् प्रत्यय कित्-वत् होते हैं।
🔥 उदाहरण: - बभूव। भू+लिट्। भू +भू+णल्। भ+भू+अ। ब+भू+वुक्+अ+अ। बभूव।
यहाँ भू को गुण का निषेध होता है, लिट् प्रत्यय के कित् होने से।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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