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अष्टाध्यायी 1.2.6

🔥 *इन्धिभवतिभ्यां च।1.2.6*
🔥 अनुवृत्ति: - लिट्, कित्।
🔥 अर्थ: - इन्धिभवतिभ्यामपि धातोः परो लिट् प्रत्यय कित्-वद् भवति। 
🔥 आर्यभाषा: - इन्धि और भवति धातु से परे लिट् प्रत्यय कित्-वत् होते हैं। 
🔥 उदाहरण: - बभूव।  भू+लिट्।  भू +भू+णल्। भ+भू+अ।  ब+भू+वुक्+अ+अ। बभूव। 
यहाँ भू को गुण का निषेध होता है, लिट् प्रत्यय के कित् होने से।

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