🔥 *मृडमृदगुधकुषक्लिशवदवसः क्त्वा।1.2.7*
🔥 अनुवृत्ति: - कित्।
🔥 अर्थ: - मृड-मृद-गुध-कुष-क्लिश-वद-वसेभ्यो धातुभ्यो परो क्त्वा प्रत्यय कित्-वद् भवति।
🔥 आर्यभाषा: - मृड आदि धातुओं से परे क्त्वा प्रत्यय किद्-वद् होता है।
🔥 उदाहरण: - वद्+क्त्वा। वद्+त्वा। वद्+इट्+त्वा।उ अ द् +इत्वा। उदित्वा। यहाँ सेट् *(स+इट्)* क्त्वा प्रत्यय कित् होने से संप्रसारण होता है।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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