🔥 *समो गम्यऋच्छिभ्याम्।1.3.29*
🔥 प वि:- समः 5.1। गमि-ऋच्छिभ्याम् 5.1।
🔥 अनु.:- अकर्मकात्।
🔥 अर्थ: - सम्-उपसर्गपूर्वाभ्याम् अकर्मकाभ्याम् गमि-ऋच्छिभ्याम् धातुभ्यां कर्तरि आत्मनेपदं भवति।
🔥 आर्यभाषा: - सम्-उपसर्गपूर्वक अकर्मक गमि-ऋच्छि धातुओं से कर्तृवाच्य में आत्मनेपद होता है।
🔥 उदाहरण: - *गमि*:- संगच्छते। *ऋच्छि*:- समृच्छते।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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