🔥 *भासनोपसंभाषाज्ञानयत्नविमत्युपमन्त्रणेषु वदः।1.3.47*
🔥 प वि:- भासन-उपसंभाषा-ज्ञान-यत्न-विमति-उपमन्त्रणेषु 7.3। वदः 5.1।
🔥 अर्थ: - भासन-उपसंभाषा-ज्ञान-यत्न-विमति-उपमन्त्रणेषु अर्थेषु वर्तमानाद् वदः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं भवति।
🔥 आर्यभाषा: - भासन-उपसंभाषा-ज्ञान-यत्न-विमति-उपमन्त्रण अर्थों में वर्तमान वद् धातु से कर्तृवाच्य में आत्मनेपद होता है।
🔥 उदाहरण: - *भासन* व्याकरणशास्त्रे वदते। व्याकरण शास्त्र में दीप्यमान होकर उसके अर्थों को प्रकाशित करता है।
*यत्न* क्षेत्रे वदते। क्षेत्र विषयक उत्साह को प्रकट करता है।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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