🔥 *समः प्रतिज्ञाने।1.3.52*
🔥 प वि: - समः 5.1। प्रतिज्ञाने 7.1।
🔥 अनु.: ग्रः।
🔥 अर्थ: - प्रतिज्ञाने अर्थे वर्तमानाद् ग्रः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं भवति।
🔥 आर्यभाषा: - स्वीकार करने अर्थ में वर्तमान ग्रः धातु से कर्तृवाच्य में आत्मनेपद होता है।
🔥 उदाहरण: - शब्दं नित्यं *संगिरते* । शब्द नित्य है, ऐसी प्रतिज्ञा करता है।
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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