🔥 *अपाद् वदः।1.3.73*
🔥 प वि:- अपात् 5.1। वदः 5.1।
🔥 अनु.:- कर्त्रभिप्राये क्रियाफले।
🔥 अर्थ: - क्रियाफले कर्त्रभिप्राये सति अप-उपसर्गपूर्वाद् वदः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं भवति।
🔥 आर्यभाषा: - क्रियाफल कर्ता को अभिप्रेत होने पर अप-उपसर्गपूर्वक वद्-धातु से कर्तृवाच्य में आत्मनेपद होता है।
🔥 उदाहरण: - धनकामः न्यायम् *अपवदते।* धन की कामना वाला न्याय का खंडन करता है।
*वद व्याक्तायां वाचि* ( भ्वादि)
*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...
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