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अष्टाध्यायी 1.3.73

🔥 *अपाद् वदः।1.3.73*
🔥 प वि:- अपात् 5.1। वदः 5.1।
🔥 अनु.:- कर्त्रभिप्राये क्रियाफले।
🔥 अर्थ: - क्रियाफले  कर्त्रभिप्राये सति अप-उपसर्गपूर्वाद् वदः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं भवति। 
🔥 आर्यभाषा: - क्रियाफल कर्ता को अभिप्रेत होने पर अप-उपसर्गपूर्वक वद्-धातु से कर्तृवाच्य में आत्मनेपद होता है। 
🔥 उदाहरण: - धनकामः न्यायम् *अपवदते।* धन की कामना वाला न्याय का खंडन करता है।
*वद व्याक्तायां वाचि* ( भ्वादि)

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