Skip to main content

अष्टाध्यायी 3.1.1

🔥 *प्रत्ययः।* 3.1.1। 
    प वि:- प्रत्ययः 1.1।    
अर्थ: -  प्रत्ययः इति अधिकारो अयम् आ पञ्चमाध्यायपरिसमाप्तेः।
आर्यभाषा:- प्रत्यय यह अधिकार है। इसके आगे जो कहेंगे उनकी प्रत्यय संज्ञा जाननी चाहिये , प्रकृति, आगम,उपाधि, विकार को छोड़कर।
उदाहरण:- तव्यत्, तव्य, अनीयर्, सन् इत्यादि।

Comments

Popular posts from this blog

लोप प्रकरण

*लोपः प्रकरणः*:- *अदर्शनं लोपः* १.१.५९ *प्रत्ययस्य लुक्श्लुलुपः* १.१.६० *प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम्* १.१.६१ *न लुमताsङ्गस्य* १.१.६२ अर्थ :- अदर्शन , अनुच्चारण की लोप संज्ञा है। अर्था...

अष्टाध्यायी सूत्र प्रकार

🔥 *अष्टाध्याय्याः सूत्राणां विभागाः* अष्टाध्यायी में सभी सूत्र सात प्रकार के हैं:- संज्ञापरिभाषाविधिनिषेधनियमातिदेशाधिकाराख्यानि सप्तविधानि सूत्राणि भवन्ति। 1. *स...

एध धातु आत्मनेपदी

🔥 एधँ वृद्धौ , भ्वादि गण, उदात्त, अनुदात्त(आत्मनेपदी) 1. *लट् लकार* एधते, एधेते , एधन्ते।  एधसे, एधेथे , एधध्वे। एधे, एधावहे , एधामहे। 2. *लिट् लकार* एधाञ्चक्रे , एधाञ्चक्राते , एधाञ्चक...