अष्टाध्यायी 1.2.4 December 23, 2017 🔥 *सार्वधातुकमपित्। 1.2.4* 🔥 प वि:- सार्वधातुकम् 1.1। अपित्। 1.1। (प इत् यस्य सः पित्) 🔥 अर्थ: - पित्- भिन्नः सार्वधातुकप्रत्ययो ङिद्-वद् भवति। 🔥 आर्यभाषा: - पित् से भिन्न सार्वधातुकप्... Read more
अष्टाध्यायी 1.2.3 December 23, 2017 🔥 *विभाषोर्णोः।1.2.3* 🔥 प वि:- विभाषा 1.1। ऊर्णोः 5.1। 🔥 अर्थ: - ऊर्णोः धातोः पर इडादिप्रत्ययो विकल्पेन ङिद्-वद् भवति। 🔥 आर्यभाषा: - ऊर्णु धातु से परे इडादिप्रत्यय विकल्प से ङित् वत् ... Read more
अष्टाध्यायी 1.2.2 December 23, 2017 🔥 *विज इट्।1.2.2* 🔥 प पि:- विजः 5.1। इट् 1.1। 🔥 अर्थ: - विजो धातोः पर इडादिप्रत्ययो ङिद्-वद् भवति। 🔥 आर्यभाषा: - विज धातु से परे इडादि प्रत्यय ङिद्-वद् होते हैं। 🔥 उदाहरण: - विज् + तृच्। विज+... Read more
अष्टाध्यायी 1.2.1 December 23, 2017 *प्रथमाध्यायस्य द्वितीयः पादः* 🔥 *गाङ्कुटादिभ्योsञ्णित् ङित्। 1.2.1* 🔥 प वि:- गाङ्-कुटादिभ्यः 5.3। अञ्णित् 1.1 ङित् 1.1। (कुट आर्दियेषां ते कुटादयः। ) 🔥 अर्थ: - गाङ्-आदेशात् और कुटादिभ्... Read more
अष्टाध्यायी 1.3.58 December 23, 2017 🔥 *नानोर्ज्ञः।1.3.58* 🔥 प वि:- न। अनोः 5.1। ज्ञः 5.1। 🔥 अनु.:- सनः। 🔥 अर्थ: - सन्नन्तात् अनु-उपसर्गपूर्वाद् ज्ञः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं न भवति। 🔥 आर्यभाषा: - सन्नन्त अनु-उपसर्गपूर्वक ज्... Read more
अष्टाध्यायी 1.3.57 December 23, 2017 🔥 *ज्ञाश्रुस्मृदृशां सनः।1.3.57* 🔥 प वि:- ज्ञा-श्रु-स्मृ-दृशाम् (पंचमी-अर्थे) 6.3। सनः 5.1। 🔥 अर्थ: - सन्नन्तेभ्योः ज्ञा-श्रु-स्मृ-दृश्भ्यो धातुभ्यः कर्तरि आत्मनेपदं भवति। 🔥 आर्यभाषा: - ... Read more
अष्टाध्यायी 1.3.56 December 23, 2017 🔥 *उपाद् यमः स्वकरणे।1.3.56* 🔥 प वि:- उपात् 5.1। यमः 5.1। स्वकरणे 7.1। 🔥 अर्थ: - स्वकरणे अर्थे वर्तमानाद् उप-उपसर्गपूर्वाद् यमः धातोः कर्तरि आत्मनेपदं भवति। पाणिग्रहणमिह स्वकरणं गृह्य... Read more